पेट का कुदरती साथी
January 29, 2019 • Swasthaya Rakshak

 

आज की बदलती हुई जीवन शैली में पेट की परेशानी एक बहुत ही आम समस्या हो गई है। पेट का रोग शरीर के अनेकों अन्य रोगो का जनक होता है। हम कह सकते हैं कि स्वस्थ पेट एक स्वस्थ शरीर का द्योतक हैं। यदि आपका पेट सही है तो आपको अन्य रोग होने का खतरा भी कम रहता है। पेट हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। यह खाद्य पदार्थों को पचाने, विभिन्न एंजाइमों को उत्पादित करने का कार्य करने के साथ-साथ छोटी ऑत को नुकसान पहुँचाने वाले परजीवियों से भी बचाने का कार्य करता हैं। पेट बॉयी पसलियों के पिंजर के नीचे व पेडू के उपरी में हिस्से में स्थित रहता हैं । इसका उपरी हिस्सा Esophagus को और निचला हिस्सा छोटी ऑत से जुड़ता है। हर व्यक्ति के पेट का साइज अलग हो सकता है परंतु Jआकार समान रहता है। यदि पेट ठीक रहता है तो अन्य रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है। आजकल अनेकों अनुसंधान इस ओर संकेत कर रहे हैं कि शरीर के अन्य अंगों की बीमारियों का पेट के स्वास्थ्य से महत्वपूर्ण सूत्र जुड़े रहते हैं। हम यहाँ कुछ साधारण पेट रोगों का उल्लेख करेंगे जिनसे प्रायः हर व्यक्ति को कभी न कभी सामना करना पड़ता हैं।

कब्ज - भोजन में फाइबर व चिकनाई की कमी, पानी का कम सेवन करने से कब्ज की शिकायत हो जाती है। कब्ज की परेशानी के कारण भूख भी खुलकर नहीं लगती हैं। इस परेशानी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीनाचाहिये, खाने में रेशेदार पदार्थों का सेवन भी लाभकारी होता है।

दस्त -  में हल्का सुपाच्य भोजन ग्रहण करना चाहिए। दही और केले का सेवन भी लाभदायक होता हैं। गैस की समस्या - अनियमित खान-पान, लंबे समय तक भूखे रहने या गरिष्ठ भोजन करने से भी पेट में गैस की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

अपच- जरूरत से ज्यादा खाने, अत्यंत गरिष्ठ एंव मसालेदार खाना खाने से कई बार अपच की समस्या हो जाती है। पेट भारी महसूस होने लगता है।

गैस व अपच की समस्या में काला नमक, हींग, अजवाइन, जलजीरा इत्यादि सहायक हो सकता है।

एसिडिटी - भोजन को पचाने वाला एसिड या अम्ल आवश्यकता से अधिक मात्रा में बन जाता है तो एसिडिटी की समस्या हो जाती है। मसालेदार एंव वसायुक्त गरिष्ठ भोजन का सेवन, अधिक दवाइयों का सेवन मुख्यतः इसका कारण होती हैं। नियमित समय पर हल्का सुपाच्य भोजन, पर्याप्त पानी पीना, केला, तरबूज, पपीता, खीरा को दैनिक भोजन में शामिल करने से इस समस्या पर नियंत्रण किया जा सकताहैं। तरबूज का रस व नारियल पानी भी लाभकारी होता हैं।

पेप्टिक अल्सर- पेट या छोटी ऑत की परत में होने वाले घाव को पेप्टिक अल्सर कहते हैं। लंबे समय तक भूखे रहने, तनाव, मसालेदार मिर्ची वाला भोजन अल्सर का प्रमुख कारण हैं। दर्दनाशक दवाओं के अधिक सेवन से भी अल्सर होने की संभावना रहती हैं।इस समस्या से बचाव के लिए नियमित समय पर हल्का भोजन करना चाहिए भोजन में रेशेदार पदार्थों का समावेश होना चाहिए। फल एंव सब्जियों का सेवन लाभकारी होता हैयदि पेट की कोई भी समस्या होती है तो साधारणतः उसके लिये दवा ली जाती है। परंतु आज ऐसे अनेकों खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट्स उपलब्ध हैं जो पेट को ठीक रख सकते हैं। इन्हें प्रोबायोटिक्स कहते हैं।

प्रोबायोटिक्स क्या हैं?   प्रोबायोटिक्स वे जीवित बैक्टीरिया हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिये लाभकारी हैंमुख्यतः हमारे पाचन तंत्र के लिए। साधारणतः हम बैक्टीरिया से बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु समझते हैंपरंतु हमारे शरीर में -Inflammatory bowel dis- - Inflammatory bowel disease (IBD) - डायरिया (वायरस, बैक्टीरिया जनित) इसके अतिरिक्त कुछ शोध यह भी इंगित करते हैं कि यह निम्न समस्याओं से निबटने में भी सहायक हो अनेकों बैक्टीरिया होते हैं कुछ बुरे एंव कुछअच्छे। प्रोबायोटिक्स वे अच्छे बैक्टीरिया हैं जो हमारे पेट को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं। अच्छे बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं। इसके अतिरिक्त प्रोबायोटिक्स कुछ भोज्य पदार्थों एंव सप्लीमेंट्स द्वारा भी शरीर में पहुँचाए जा सकते हैं। पिछले लगभग 25 वर्षों से इनके महत्व एंव लाभों को अधिक जाना गया है। डॉक्टर भी इनका सेवन करने की सलाह पाचन क्रिया से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए दे रहे हैं। प्रोबायोटिक्स इस प्रकार से स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।- यदि शरीर में अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं, जैसे एन्टीबायोटिक्स लेने के बाद, तो प्रोबायोटिक्स उन्हें फिर से पर्याप्त संख्या में पहुंचाने में लाभदायक होते है। - प्रोबायोटिक्स अच्छे एंव बुरे बैक्टीरिया में सही संतुलन बनाये रखने में मददगार होते हैं। ताकि शरीर सुचारू रूप से कार्य कर सके।

प्रोबायोटिक्स के कार्य -      प्रोबायोटिक्स आंतो में अच्छा वातावरण निर्मित करने में सहायक होते हैं। पेट की निम्न समस्याओं का इनके द्वारा उपचार संभव हैं- Irritable bowel syndrome (IBS)-Inflammatory bowel dis- - Inflammatory bowel disease (IBD)

- डायरिया   (वायरस, बैक्टीरिया जनित) इसके अतिरिक्त कुछ शोध यह भी इंगित करते हैं कि यह निम्न समस्याओं से निबटने में भी सहायक होसकते हैं-

त्वचा से संबंधित रोग जैसे एक्जिमा -हैं। 

मूत्र विसर्जन एंव जननांगो के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ

- एलर्जी से बचाव -

मुख संबंधी स्वास्थ्य

प्रोबायोटिक्स ऑतों में स्वस्थ वातावरण बनाये रखने 'अच्छे व बुरे बैक्टीरिया में संतुलन में सहायक होते हैं। एक सामान्य पाचन पथ में लगभग चार सौ प्रकार के प्रोबायोटिक बैक्टीरिया पाये जाते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि रोक कर एक स्वस्थ पाचन प्रणाली बनाये रखने में सहायता करते हैं। आँतों में पाये जाने वाले प्रोबायोटिक बैक्टीरिया में Lactic Acid bacteria सर्वाधिक संख्या में मौजूदा होताLactic Acid bacteria सर्वाधिक संख्या में मौजूदा होता हैं। इसका एक रूप Lactobacillus acidophilus दही में पाया जाता हैं जो रोजमर्रा के जीवन में खान पान में सर्वाधिक उपयोग होता है। यीस्ट भी एक प्रोबायोटिक पदार्थ ही है। इसके अतिरिक्त इन्हें सप्लीमेन्ट के रूप में भी लिया जा सकता हैं।

प्रोबायोटिक बैक्टीरिया के अनेकों प्रकार होते हैं। हर व्यक्ति के शरीर में इनका संयोजन अलग अलग प्रकार से होता है जैसे कि हमारी उंगलियों की छाप, उसी तरह हर व्यक्ति का प्रोबायोटिक संयोजन अनोखा होता है। वैसे तो प्रोबायोटिक्स अनेकों प्रकार के होते हैं पर पेंहा हम कुछ मुख्य प्रकारों का उल्लेख करेंगे। निम्न दो प्रकारों का सबसे ज्यादा उपयोग होता हैं एंव अनुसंधान भी सबसे ज्यादा इन पर हुआ हैं।

1. Lactobacillus - बैक्टीरिया का यह प्रकार लैक्टेस का उत्पादन करता है यह एंजाइम लैक्टोस व दुग्ध शर्करा को विभाजित करता है। इससे लैक्टिक एसिड भी उत्पादित होता है जो कि खराब बैक्टीरिया की जनसंख्या को नियंत्रित करता है। यह मॉसपेशियों को उर्जा प्रदान करने में सहायक होता है एंव शरीर को मिनरल्स अवशोषित करने में भी सहायता प्रदान करता हैं। किसी मिश्रित प्रोबायोटिक में इसकी उपस्थिति को L लिखकर दर्शाते हैं।

2 Bifidobacteria - बैक्टीरिया की इस प्रजाति का भोजन एंव सप्लीमेंट्स में काफी उपयोग होता है ये रोगप्रति. रोधी तंत्र को मजबूती देते हैं। ऑतों में हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़त को सीमित करते है। लैक्टोस को इन न्यटिएन्टस विभाजित करते हैं जिन्हें शरीर उपयोग में ला सके। किसी मिश्र बैक्टीरिया में इसकी उपस्थिति को द्वारा B इंगित किया जाता हैं।

प्रोबायोटिक्स के कुछ सामान्य स्ट्रेन्स   - B. animalis - B. breve - B. lactis - B. longum - L. acidophilus - L. reuteri प्रत्येक प्रोबायोटिक स्ट्रेन का शरीर पर

प्रत्येक प्रोबायोटिक स्ट्रेन का शरीर पर अलग अलग प्रभाव होता है ये हमें भोज्य पदार्थ अथवा सप्लीमेंट द्वारा प्राप्त हो सकते हैं। अब हम प्रोबायोटिक युक्त भोज्य पदार्थों के बारे में जानेंगे ।

1. दही - प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों में दही सबसे अच्छा हैं। आज कल बाजार में बिकने वाली प्रोबायोटिक दही खूब प्रचलित हैं। घर पर जमाया हुआदही भी फायदेकारक हैं। दूध से दही बनने की प्रक्रिया में लेक्टोबेसिलस जीवाणु अपनी भूमिका निभाते हैं।

2. छाछ – पांरपरिक छाछ जो कि मक्खन बनने के बाद बचे हुए पानी को कहा जाता हैं मेंप्रोबायोटिक से पाये जाते हैं।

3. अचार - नमक के पानी में तैयार की गई ककड़ियों को घेर. कन कहा जाता हैं। इन ककड़ियों को कुछ समय अपने ही बैक्टीरिया में खमीर किया जाता हैजिससे वे खट्टी होजाती हैं। ये ककड़ियाँ प्रोबायोटिक का बहुत अच्छा स्त्रोत हैं। परंतु यह ध्यान देने योग्य बात है कि सिरके में बने अचार में प्रोबायोटिक नहीं पाये वा जाते हैं।

4. किमची - यह एक कोरियन डिश हैं मुख्यतः यह पत्तागोभी से बनती है परंतु साब्जियाँ भी प्रयोग में लाई जाती है। यह खमीरीकृत पत्तागोभी में लहसुन, अदरक, छोटे प्याज, एव नमक मिच डाल कर बनाई जाता हैइसमें लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया Lactobacillus kimchi एंव अन्य लैक्टिक एसिडबैक्टीरिया पाये जाते हैं जो पाचन तंत्र के स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाते हैं।

सोयाबीन से कई प्रोबायोटिक्स बनते हैंजिनमें से कुछ ये हैं

- 5. Tempeh - यह एक खमीर युक्त सोयाबीन उत्पाद हैं। यह इंडोनेशिया की देन है पर अब अनेकों देशों में लोकप्रिय है। यह एक उच्च प्रोटीन खाद्य है जो कि शाक. होहिारी लोगो के लिये मीट का स्थानापन्न कहलाता हैं। 6. नाटो (Natto) - यह भी एक खमीरयुक्त सोयाबीन उत्पाद हैं। यह जापान का आहार हैं। इसकी एक विशेष गंध होती है और चिकना फिसलने वाला पदार्थ होता हैं। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन K2 होता हैं। इसमें Bacillus Subtilis स्ट्रेन पाया जाता हैं।

7. मिसो (Miso) - यह एक प्रचलित जापानी डिश हैंयह पांरपरिक रूप से खमीर किये हुए सोयाबीन पेस्ट नमक एंव कोजी नामक फंगस से बनती है।

आज अनेकों स्वास्थ्यवर्धक प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं जिनका सेवन किया जा सकता है जैसे कई प्रकार के खमीर किये हुए सोयाबीन, डेरी उत्पाद एंव सब्जियाँ। हमने इनमें से कुछ का उल्लेख किया है पर इसके अतिरिक्त भी कई खाद्य सामग्रियाँ हैं। यदि इनका सेवन कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है तो प्रोबायोटिक सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं। दोनों प्रकार से लिये गये प्रोबायोटिक्स स्वास्