लम्बैगो यानी पीठ का दर्द
February 17, 2019 • Swasthaya Rakshak

    पीठ         दर्द की समस्या देश में ही नहीं बल्कि विश्वभर के लोगों की एक ऐसी समस्या है जिससे लाखों लोग जूझते हैं। इनमें से हजारों एलोपैथी, होम्योपैथी, योग, अल्ट्रासाउन्ड, रेडिएयान थैरेपी और लाखों लोग देसी दवाओं का सहारा लेते हैं। इनमें से भी जो सबसे अधिक परेशान होती हैं वे हैंमहिलाएं, क्योंकि वे अकसर काफी लंबे समय तक रोग को या तो छिपाती रहती हैं या फिर दर्द निवारक दवाएं खाकर डॉक्टर के पास जाना टालती रहती हैं। यही कारण है कि पीठ दर्द उनके लिए कभी कभी इतना गंभीर रूप लेता है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत तक आ जाती है। या फिर लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं खाने से वे अलसर या गैस्टराइटिस की शिकार हो जाती हैं या फिर उनका लिवर, प्रभावित हो जाता है और वे नई परेशानी में फंस जाती हैं।

पीठ दर्द और एक्यूपंक्चर      एक्यूपंक्चर एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिससे पीठ दर्द का कारगर उपचार संभव हो सकता है। हाल ही के एक अध्ययन से यह सिद्ध हो गया है कि एक्यूपंक्चर से जटिल से जटिल पीठ दर्द का उपचार किया जा सकता है।

पीठ दर्द और आयुर्वेद -  लम्बैगो यानी पीठ का दर्द एक ऐसा रोग हैजिससे हर 5 में से तीसरा व्यक्ति इससे जीवन के किसी न किसी मोड़ पर ज़रूर पीड़ित होता है और महिलाओं में तो इसकी प्रतिशत और भी अधिक है। लम्बैगो से कैसे बच सकते हैं हम ? ठीक प्रकार से बैठना लम्बैगो से बचाव का एक सबसे बड़ा उपाय है। इसके अलावा हल्का नियमित व्यायाम, भारी सामान उठाते समय झटके से बचना या फिर अपने शरीर की क्षमता से अधिक वजन उठाने जैसी स्थितियों से बचना।

पेट की अग्नि की स्थिति असंतुलित हो हल्की पड़ने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। इसके मंद पड़ने से शरीर में अम्ल या आंव इकटठी होने लगती है। उपचार : शरीर में अम्ल को काबू में करने के लिए शरीर के पाचन तंत्र को आराम देने की आवश्यकता होती है, इसलिए ऐसे में व्रत एक उपचार होता है।

 हमारे रसोईघर में ही कुछ ऐसे देसी मसाले और जड़ी बूटियां होती हैं जो पीठ के इस दर्द में लाभकारी होते हैं। जैसे लाल मिर्च, सौंठ, दाल, चीनी, तिल और सरसों का तेल आदि। पीठ के दर्द में केवल कमर की ही मालिश करने की जरूरत नहीं बल्कि पूरे शरीर की मालिश की जरूरत होती है। यदि संभव हो तो गर्म पानी में कोई मोटा कपड़ा भिगो कर उससे भी हल्का हल्का सेंक किया जा सकता है। एक्यपंक्चर में रोगी के शरीर में स्थित प्रेशर पॉइन्टस यानी दबाव बिन्दुओं पर बहुत ही महीन सुइयां लगाई जाती हैं, जिससे दर्द और सूजन दोनों ही ठीक हो जाते हैं। एक्यूपंक्चर के दौरान शरीर में एक प्रकार की तरंगे उठती हैं जो शरीर को दर्द से छुटकारा दिलाती हैं। एन्डॉरफिन्स या एडेनॉसिन कहते हैंदेखा गया है कि एक्यूपंक्चर के दौरान जिस स्थान पर सुई लगाई जाती है, वहां एन्डॉरफिन का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसी कारण शरीर के उस खास भाग में दर्द से राहत मिल जाती है।

    कमर के निचले हिस्से में होने वाला दर्द लम्बैगो कहलाता है, जो कम से कम तीन महीनों या फिर इससे भी अधिक समय से चल रहा हो, फिर चाहे वह हल्का हो या तेज़। लम्बैगो केवल प्रौढों का ही रोग नहीं बल्कि उन युवाओं को भी सताता है जो लंबे समय तक बैठे रहते हैं। यदि कोई उम्र दराज़ या बड़ी उम्र का व्यक्ति हो तो यह समस्या और जटिल हो जाती है।

 अधिकतर मामलों में पीठ दर्द का कारण पता ही नहीं लग पाता। केवल 25 प्रतिशत मामलों में ही कारण जानने के बाद पीठ दर्द का उपचार किया जाता है। कई मामलों में कमर के निचले हिस्से में दर्द का कारण स्लिप डिस्क, टयूमर या ऑस्टियोपोरोसिस होता है, जिसमें हड्डियां एकदम भुरभुरी हो जाती हैं।

 ••पीठ यानी कमर के निचले हिस्से में दर्द होना, जो कभी कभी पुटठों, जांघों या ग्रोइन तक भी जाता है।

  •      यह दर्द हिलने डुलने से और अधिक बढ़ जाता है। रीढ की हडडी को हिलाने डुलाने में दर्द होना, जैसे आगे या पीछे झुकते हुए।
  •        मांसपेशियों में अकड़न तथा कमर का अकड़ जाना। कभी कभी कमर में दाईं या बाईं ओर केपल एक ओर ही तेज दर्द के साथ                   ही शरीर        का एक ओर झुक जाना।
  •       कई बार तो दर्द के साथ ही कमर, पुट्ठों और टांगों का सुन्न पड़ जाना।

यदि कभी आपको महसूस हो कि आप मूत्र या मल त्याग की क्रिया पर आपका नियंत्रण खो रहा है या आपकी कमर का निचला हिस्सा या टांगे सुन्न पड़ती महसूस हो रही हों, तो आपातस्थिति समझ कर बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यदि पीठ में दर्द के साथ ही कभी लगने लगे कि उनकी टांगों या कमर में मांसपेशियां कुछ कमजोर पड़ती नज़र आ रही हैं।ये कुछ ऐसे संकेत होते हैं जिन्हें कभी हल्के नहीं लेना चाहिए और न ही इन्हें नज़रअंदाज करना चाहिए। तनेजा का कहना है कि एक्यूपंक्चर से लम्बैगो का सफल उपचार रोगी को दर्द से तुरंत ही नहीं स्थाई राहत भी दिलाता है।

योग शरीर में उत्पन्न असंतुलन या गड़बड़ी को समाप्त करने का एक बेहद कारगर और आसान उपचार है। पीठ में दर्द यानी लम्बैगो में भी योग एक कारगर विकल्प है। योग न केवल आपकी पीठ बल्कि आपके पूरे शरीर को तनाव मुक्त करेगा। यदि अकेले संभव न हो तो किसी योग शिविर में जाएं या फिर किसी योग विशेषज्ञ की मदद लें। यदि कुछ भी संभव न हो रहा हो तो केवल कमर पर दोनों हाथ रखकर पीछे आगे की ओर झुकें और फिर इसी प्रकार पीछे। ध्यान रखें कि शुरूI में न तो आगे की ओर झकने के लिए जबरन शरीर । पर कोई जोर डालें और न ही पीछे की ओर झकने के लिए। जितना आराम से हो उतना ही करें। याद रखें कि आपको पीठ दर्द केवल ठीक प्रकार से न बैठने के कारण ही नहीं बल्कि गर्भावस्था, अर्थराइटिस, फाइब्रॉसिस, खेल के मैदान में या फिर सड़क आदि पर गिरने से चोट लगने से, मोटापे के कारण, यूरिनरी इन्फैक्शन, साइटिका या फिर स्लिप डिस्क जैसे किसी कारण से भी हो सकता है। यदि पीठ दर्द लगातार बना रहे तो किसी चिकित्सा विशेषज्ञ से संपर्क अवश्य करें। या

याद रखें :   जितना आसानी से चल सके, चलें। नर्म कुर्सी पर न बैठे और पीठ को जहां तक संभव हो सीधा रखें। पीठ में दर्द के साथ ही अगर पैरों में सूजन भी हो तो ठंडे सेंक से सूजन को कम किया जा सकता है। तैरना भी पीठ दर्द में अपने आप में एक संपूर्ण व्यायाम होता है। कच्चे आलू की पुल्टिस बनाकर भी पीठ पर लगाई जा सकती है। कब्ज़ का संबंध पीठ दर्द से है। इसलिए पीठ दर्द हो तो ध्यान रखें कि पेट साफ रहे। यदि कब्ज़ हो तो अनीमा या ईसबगोल की भूसी गर्म दूध या पानी से लें।

•                                                                                                                                   डॉ.बी.एस.तनेजा